गणपतीची पुजा करताना..

गणपतीची थापनाकरयाकिरता चौरंग कवापाट आिण सभोवती मखर. पूजाथानावर बधयाकिरतानारळ , आंयचेडहाळे कवातोरण.

पायानेभरलेला तया , पळी, पंचपा , ताहन, समई, नीरजन, शंख,घंटा, हळद, कुंकू, अबीर, शदूर, गुलाल, रगोळी, दुव,तुळशी, बेल, िवयाची पाने, सुपा-या,िविवध कारची फु ले,पपूजेसाठी वेगवेगळीपी,

पंचामृत,व,जानवीजोड,उदबी,कापूर, खारीक,बदाम, नारळ , फळे सादाकरतामोदक कवािमठाई .

गणेशमूतयााणितठेलासुवात करयापूव....

कु ठयाहीमंगलकायलासुवात करताना िवनहयीगणपतीचीपूजाव आराधना करयाचीआपयाकडे था आहे. ीगणेशचतुथयािदवशी सकाळी मंगलनान करावे, पूजादीिनयिवधी करावेत. घरया देवना, सवयेठयना आिणाणाला नमकार कन कु लदेवतेचे मरण कन पूजेला सुवात करावी. रगोळीकाढून यावर पाट ठेवून मूतथापन करावीआिण मग आचमन, ाणायाम या िवधनीपूजेलासुवात करावी.

हातात अताघेऊन सव देवतचे, आई विडलचे,गुजचेमरण कन पूजेचा संकप करावा. मम आमन :ुितमृित पुराणो, फलायथीपरमेर ीयय अमाकं सकलकु टुंबान सपिरवाराण ेमथैय आयुरारोय ऐय अिभवृयथ पाथव िसििवनायक देवतापूजनमहं किरये ,असा मं हणून हातातया अता पायाबरोबर ताहनात सोडायात... यानंतर कलश , शंख , घंटाआिणदीपदेवतेची गंध, अता, फु ले वाह ू न पूजा करावी... शंखाला अता वाह ू नयेत. यानंतर गणेशमूत यादोही डोयनादुवनीतुपाचापश करावाआिण मूतया दयालाआपयाउजया हाताया अंगयानेपशकन ाणितठेचे पुढील मं आिण१५वेळाॐ हणावा.

अयै ाणा: ितठंतुअयै ाणा: रतु च। अयै देववमचयै सुितठीतमतु च।।१।।

रभोिधथ पोतोलसदणसरोजािधढाकराजै:। पाशं कोदंडिमूभवमथ गुणमयंकु शं पंचबाणा।।

िबाणसृकपालं िनयन लिसतापी नवोहाया। देवीबालाकवणभवतु सुखकरीाणशि: परा न:।।२।।

तचुदविहतं शुमुचर।। पयेमशरद : शत जीवेमशरद : शत।। इित मंेणदेवय आयेन नेोमीलनं कृ वा।।

-------------------------------------------------------अशी ाणितठाझायावर ीगणेशाला नमकार करावा... -------------------------------------------------------

एकदंत शूपकण गजव चतुभुज। पाशकु शधर देव यायेत िसििवनायक।। 3 ।।

यायेत देवमहाकाय ततकचन संिनभ। चतुभुजमहाकाय सवभरणभूिषत।। ४।।

दंतामाला परशुपूण मोदकहतक। मोदकास शुंडा एकदंत िवनायक।। ५।।

--------------------------------------------------------हे लोक हणत असतानाअंत:करणात ीगणेश मूत चेयान करावे. --------------------------------------------------------

आगछ देवदेवेश तेजोराशे जगपते। ियमाण मयापूज गृहाण सूरसम।।६।।

ीिसििवनायकाय नम:।आवाहयािम।। -------------------------------------------------------असे हणून देवालाआवाहन करावेआिण मूतवर अतावाहयात. -------------------------------------------------------

नानारनसमायुं कातवरिवभूिषत । आसनंदेव देवेश ीयथितगृता ।।७।।

ीिसििवनायकाय नम:।आसनाथ अता समपयािम।। ---------------------------------------------------असे हणून ीगणेशावर आसनासाठी अतावाहयात. ---------------------------------------------------

पांगृहाणदेवेश सवेमसमथभो। भयासमपतं तुयं लोकनाथ नमोतुते।। ८।।

ीिसििवनायकाय नम:। पादयो: पां समपयािम।।

--------------------------------------------------------असे हणून ीगणेशया पायवर फु लाने पाणीोणकरावे. --------------------------------------------------------

नमते देवदेवेश नमते धरणीधर। नमते जगदाधार अय : नितगृता ।। ९।।

ीिसििवनायकाय नम:।अय समपयािम।।

---------------------------------------------------------असे हणून पळीभर पायात गंध , अता , पुप व सुपारी ठेवून यातले पाणीफु लाने, अय हणून ीगणेशाया हातवरशपडावे. ---------------------------------------------------------

कपूरवािसतं वािर मंदािकया: समात । आचयत जगनाथ मयादंिह भित :।। १०।।

ीिसििवनायकाय नम:।आचमनीयं समपयािम।।

--------------------------------------------------------असे हणून ीगणेशाया हातावर फु लाने आचमनासाठी पाणीअपणकरावे. --------------------------------------------------------

गंगािद सवतीथयोमयााथनयात । तोयमेतसुखपशनानाथितगृता।। ११।।

ीिसििवनायकाय नम:।नानं समपयािम।।

------------------------------------------------असे हणून ीगणेशवर फु लाने पाणी शपडावे, नान घालावे. -------------------------------------------------

पयो दिध घृत चैव मधुशक रयायुत। पंचामृतेन नपन ियता परमेर।।१२।।

ीिसििवनायकाय नम:। पंचामृत नान समपयािम।।

------------------------------------------------------असे हणून ीगणेशमूत वर फु लाने पंचामृताचा अिभषेक करावा. यानंतर गंधिमित पाणी,साधे पाणी शपडावेआिणघरयादेवमाणे गंध-अता-फु ले वाह ू न, उदबी-नीरजन ओवाळून गणेशाचीपूजाकरावी आिण पंचामृताचा नैवेदाखवावा. यापूवपूजेनंतर, मूतवर वािहलेयाफु लपैकीएक-दोनफु ले काढून याचा वास घेऊन तीउरेकडे ठेवून ावीत आिणदुवनेकवा फु लानेमूतवर पायाचाअिभषेक करावा. यावेळी अथवशीषकवागणपतीतो हणावे. ---------------------------------------------अिभषेकानंतर,शंखातील पाणी, अर आिण गरमपाणीोणकरावे. --------------------------------------------------------

सवभूषािधके सौयेलोकलजािनवारणे। मयोपपािदते तुयं वाससीितगृता।। १३।।

ीिसििवनायकाय नम:।व समपयािम।।

----------------------------------------असे हणून ीगणेशालाव अपण करावे. ----------------------------------------

देवदेव नमतेतु ाहीम भवसागरा। सूं सोरीयं गृहाणपरमेर।।१४।।

ीिसििवनायकाय नम:।योपवीत समपयािम।।

---------------------------------------------------------जानवेीगणेशमूत याडायाखावन उजया हाताखाली अपण करावे. ---------------------------------------------------------

ीखंडं चंदनं िदयं गंधायं सुमनोहर। िवलेपनं सुरेठं चंदनं ितगृता।।१५।।

ीिसििवनायकाय नम:।िवलेपनाथ चंदन समपयािम।।

----------------------------------------------असे हणून ीगणेशया मतकालाचंदन लावावे. ----------------------------------------------

अतातंडुला शुाकुं कु मेनिवरािजता: मयािनवेिदताभयागृहाण परमेर।। १६।।

ीिसििवनायकाय नम:।अलंकाराथ अता समपयािम।।

--------------------------------------------असे हणून ीगणेशालाअताअपण करायात. --------------------------------------------

हिरावणवणभा सवसौभायदाियनी। सवलंकारमुयािह देिव वंितगृता।। हिराचूणसंयुं कुं कु मंकामदायकं । वालंकरण सव देिव वंितगृता।। ीिसििवनायकाय नम :। हिर कुं कु म सौभाययं समपयािम।।

-----------------------------------------------ीगणेशाला हळद,कुं कू वाहावे.

उिदताणसंकाशंजपाकु सुमसंिनभ। सीमंतभूषणाथय सदूरंितगृता।।

ीिसििवनायकाय नम :।सदूरं समपयािम।।

योनापते नमतुयं नमतेिविपणे। नानापिरमलयािणगृहाण परमेर।।

ीिसििवनायकाय नम :।नानापिरमलयं समपयािम।। -------------------------------------------ीगणेशाला शदूर, अबीर, गुलाल वाहावा. ------------------------------------------

मायािदनीसुगंिधनीमालयािदनीवैभो। मयातािन पूजाथ पुपािण ितगृता।। १७।।

ीिसििवनायकाय नम:।िविवधपुपािण समपयािम।।

----------------------------------------------------असे हणून अनेककारची फु ले, दुव, शमी वअय पीीगणेशनाअपण करायात. ----------------------------------------------------

वनपतीरसोभूतो गंधायो गंध उम :। आेय : सवदेवान धूपोयंितगृता।। १८।।

ीिसििवनायकाय नम:। धूप समपयािम।।

----------------------------------------------------असे हणून घंटावाजवून अगरबीने गणरायालाओवाळावे. ----------------------------------------------------

आयंच वतसंयुं वहनायोिजतं मया। दीपं गृहाण देवेश ैलोयितिमरापह।।१९।।

ीिसििवनायकाय नम:।दीप समपयािम।।

-------------------------------------------या मंानेहणूननीरजनानेीगणेशना ओवाळावं. -------------------------------------------

नैवे गृता देव भिमेचला कु । ईसतमेवर देिह पर च परा गित।। शक राखंडखाािन दिधीरघृतािन च । आहारंभयभोयं च नैवेंितगृता।। २०।।

ीिसििवनायकाय नम:।नैवे समपयािम।।

--------------------------------------असं हणून ीगणेशालामोदकाचाकवा िमठाईचा नैवेदाखवावा. --------------------------------------

पूगीफलं महियं नागवलीदलैयुत। कपूरैलासमायुं तबुलं ितगृता।।

िहरयगभगभथं हेमबीजं िवभावसो। अनंतपुयफलदमत : शत यछ मे।।२१।।

ीिसििवनायकाय नम:। पूगीफल तबुल सुवणिनयदिणा समपयािम।।

-----------------------------------------असे हणून मूत समोरील िवयावर पाणी सोडावे. -----------------------------------------

गणािधप नमतेतु उमापुाघनाशन। एकदंते भवेित तथा मूषकवाहन।।२२।।

िवनायकेश पुेित सविसिदायक। कु मारगुरवे िनय पूजनीया: यनत:।। २३।।

-----------------------------------------------हे मं हणून 21 दुवीगणेशना अपण करायात. ------------------------------------------------

यािन कािन च पापािन जमतरकृ तािन च।

तािन तािन िवनयत दिणपदे पदे।। २४।।

-----------------------------------------------असा मं हणून वत:भोवती 3 दिणा घालाया . -----------------------------------------------

नम: सविहताथय जगदाधार हेतवे। साटगोय णामते यनेन मया कृ त:।। २५।।

-------------------------------------------------------असा मं हणून ीगणेशासमोर साटग नमकार घालावा. -------------------------------------------------------

िवनायकेशपु व गणराज सुरोम। देिह मे सकला कामा वंदे िसििवनायक।। २६।।

ीिसििवनायकाय नम:।मंपुप समपयािम।।

-----------------------------------------------------असे हणून ीगणेशना फु ले अपणकरावीव हात जोडून पुढील ाथनाकरावी... -----------------------------------------------------

आवाहन न जानािमन जानािम तवाचन। पूजा चैव न जानािमयता परमेर।। २७।। मंहीन ियाहीन भिहीन सुरेर। यपूिजत मयादेव पिरपूण तदतु मे।। २८।।

अयथाशरण नात वमेव शरणमम। तमाकाय भावेनर र परमेर।। २९।।

गतं पापं गतं दु: खंगतंदािर्यमेव च। आगतासुखसंपी : पुयाच तव दशना।। ३०।।

पंदेिह जयं देिह यशो देिह िषो जिह। पुा देिह धनं देिह सव कामच देिह मे।। ३१।।

यय मृयाचनामोया तप : पूजािया िदशु। यूनंसंपूणत याित सोवदेतमयुत।। ३२।।

-------------------------------------------------------अशी ीगणेशची ाथनाझायावर आरती करावी,यानंतर मंपुपजलीअपणकरावी आिणसवनीतीथ-साद यावा. यजमानाने पुहादोन वेळाआचमन करावे. ----------------------------------------------



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